जानें, क्‍या है नई लैंड पूलिंग योजना, बदलेगी गांव की सूरत और सिरत

अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक चला तो यह तय है कि दिल्‍ली के गांवों की सूरत और सिरत बदल जाएगी। यह कमाल दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की नई लैंड पूलिंग नीति से होगा। यह नीति पिछले डेढ़ साल से बनकर तैयार थी, अब 89 गांवों को शहरीकृत क्षेत्र का दर्जा मिलने के साथ ही इसे अमल में लाने का सपना साकार होगा।

उपराज्यपाल अनिल बैजल के आदेश पर जारी अधिसूचना से आने वाले समय में दिल्ली के बाहरी इलाकों में भी विकास को गति मिलेगी। इस पर अमल होने से दिल्ली में 24 लाख मकान बन सकेंगे। इससे दिल्‍ली में आवास के लिए भटक रहे लोेगों काे छत मुहैया होगी। डीडीए का दावा है कि यह छोटे भूखंड मालिकों के लिए भी फायदेमंद होगा।

उत्तरी दिल्ली के 50 गांव तथा दक्षिणी दिल्ली के 39 गांवों को अब शहरीकृत गांवों का दर्जा दिया गया है। इन इलाकों को शहरीकृत ग्रामीण इलाके का दर्जा मिलने के बाद अब यहां सरकार की लैंड पूलिंग योजना के तहत किसान से डेवलपर सीधा समझौता करके जमीन पर विभिन्न योजनाओं से जुड़े प्रोजेक्ट को अंजाम दे सकेंगे।

योजना पर वर्ष 2015 मई माह में ही केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से पहले ही मुहर लग चुकी है।

इसमें विकसित जमीन का लगभग 12 फीसद हिस्सा सामुदायिक कार्यों के लिए दिल्ली सरकार को दिए जाने, स्टांप ड्यूटी भी माफ करने की योजना है।

हालांकि इसके लिए किसान अथवा प्रमोटर या डेवलपर द्वारा पेश किए गए नक्शे की जांच स्थानीय अधिकारी (पटवारी, लेखपाल) के जरिए कराई जाएगी, जिसमें नक्शा सही पाए जाने पर ही यह लाभ मिलेगा।

विधायक व डीडीए के सदस्य विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि योजना में छोटे किसानों को भी राहत दिया जाएगा। जिसमें खर्च इत्यादि से जुड़े मामले की भरपाई डेवलपर अथवा प्रमोटर द्वारा की जा सकती है।

वर्ष 2022 तक सबको आवास देने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को भी साकार होने में यह फैसला काफी मददगार साबित होगा।

पिछले दिनों इसी मसले पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने विभिन्न निकायों और दिल्ली सरकार के साथ बैठक भी की थी। जिसमें इन गांवों को शहरी दर्जा देने के संबंध में आगे की प्रगति को लेकर बात हुई थी।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने पिछले वर्ष 26 मई को डीडीए की नई लैैंड पूलिंग नीति को पांच संशोधनों के साथ मंजूरी दी थी। उसके बाद से गांवों को विकास क्षेत्र और शहरी गांव घोषित किए जाने का इंतजार किया जा रहा है।

पिछले वर्ष अक्टूबर में इन गांवों का मालिकाना हक राजस्व विभाग से दिल्ली सरकार को स्थानांतरित करने के लिए सर्कुलर भी जारी किया गया था, लेकिन अब जाकर यह फैसला हुआ है।

डीडीए के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं नई लैंड पूलिंग योजना के तहत विकास में जमीन मालिकों को साझेदार बनाने का प्रावधान है तथा इसको दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी 20 हेक्टेयर और इससे अधिक भूमि तथा दूसरी श्रेणी 20 हेक्टेयर से कम की भूमि के लिए है।

Source:http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-ncr-delhi-development-authority-new-land-pooling-policy-will-be-developed-of-the-village-16046911.html?src=Search-ART-land-pooling-policy